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पंचयात चुनाव 2021 एक अहम परिचर्चा

देश के कर्णधारों ने कभी सत्ता के विकेंद्रीकरण का स्वप्न देखा था और ग्राम स्तर तक सरकार को पहुचाने के लिए ग्राम पंचायत की व्यवस्था की थी , आज बिहार में  उसी ग्राम पंचायत चुनाव का जश्न चल रहा है |हर व्यक्ति उसमे भागीदारी को तत्पर है |हर मोड़ , गली नुक्कड़ , गाँव की बाजारों में चुनावों की ही चर्चा है | चर्चा होना सहज है और आवश्यक भी है | किन्तु चर्चा जाति गत आकड़ों की न होकर विकास की योजनाओं की होनी चाहिए | भारत के गावों में आज भी गरीबी, अशिक्षा,बिमारी कुपोषण की तरह फैली हुई है | बीते वर्षों में विकास हुआ है किन्तु उसकी गति संतोष जनक नहीं रही है | सरकारों की योजनाओं ने नीति निर्धारकों और उनका संचालन करने वालों की तिजोरियां तो भरी लेकिन योजना का लाभ उपयुक्त व्यक्ति तक नहीं पहुचा |आज पंचायत चुनाव को कमाई का बहुत ही बड़ा साधन बना दिया गया है | नेतृत्वकर्ता चुनाव जीतने पर मिलने वाली शक्ति का उपयोग ग्राम विकास के लिए नहीं बल्कि स्वयं के विकास के लिए करता है | चूँकि अभी भी ग्रामीण भारत बहुत पीछे है इसलिए ग्राम स्तर पर आज भी अच्छे और समाज के हित के लिए काम करने वालों के लिए बहुत से अवसर हैं |जरूरत है इच्छाशक्ति की , अच्छी और विकासवाद की सोच की जो की जातिवाद के बंधन से मुक्त हो | संसाधनों की कमी नहीं रह गई है सरकार की बहुत सी योजनाये मददगार हो सकती है |सरकारी योजनाओ से ज्यादा ग्राम स्तर पर लोगों के जागरूक और संघठित होने की जरूरत है | शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण, सामाजिक उत्थान ये वो विषय हैं जिनके सम्बन्ध में आज की ग्राम पंचायतों को सबसे अधिक सोचने की आवश्यकता है | मेरा ये अनुभव है की सूचना का अभाव विकास के दरवाजे बंद कर देता है |नेतृत्वकर्ता समाज को बहुत कुछ दे सकता है | ग्राम पंचायत स्तर पर चुनौतिया अधिक हैं लेकिन कुछ करने के अवसर उतने ही ज्यादा| आवश्यकता है चुनाव जीतकर उसको समाजसेवा का अवसर समझने की न की कमाई करने का अधिकार ।अन्ततः यही कहूँगा विकासकर्ता चुनें, तिजोरीभर्ता नहीं।।
~~राकेश कृष्णा

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